यूपी लोक सेवा आयोग के फैसलों से अभ्यर्थियों में बढ़ा गुस्सा किया ये बड़ा ऐलान
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यूपी लोक सेवा आयोग में एक बार फिर से पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव के कार्यकाल में हुए प्रतियोगी छात्रों के आंदोलन जैसे आसार बनते दिख रहे हैं.
पीसीएस 2018 के रिजल्ट को लेकर जहां प्रतियोगी छात्रों में जबरदस्त नाराजगी है और आयोग के खिलाफ उनका गुस्सा कभी भी भड़क सकता है, वहीं अब 20 सितंबर को होने वाली समीक्षा अधिकारी/सहायक समीक्षा अधिकारी 2016 की प्रारम्भिक परीक्षा के पहले आयोग द्वारा भर्ती के विज्ञापन में किये गए बदलावों को लेकर भी अभ्यर्थियों की नाराजगी खुलकर सामने आ रही है.
समीक्षा अधिकारी/सहायक समीक्षा अधिकारी 2016 की प्रारम्भिक परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों ने काला कपड़ा पहनकर विरोध दर्ज कराने का बड़ा ऐलान किया है. बुधवार सुबह से ही सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म पर प्रतियोगी छात्रों का यह निर्णय वायरल हो रहा है सौजन्य से न्यूज 18 ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस खबर के बारे में जब प्रतियोगी छात्रों से बात की तो उनकी आयोग से नाराजगी खुलकर सामने आयी है. प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि यह पुरानी भर्ती है और परीक्षा के ऐन पहले माइनस मार्किंग करना पूरी तरह से गलत है. इससे अभ्यर्थियों की मानसिक स्थिति पर बेहद खराब प्रभाव पड़ा है. इसके साथ ही परीक्षा में 13 गुना अभ्यर्थियों को क्वालीफाई कराने का भी फैसला पूरी तरह मनमाना पूर्ण है.
गौरतलब है कि, आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव के कार्यकाल में हुए कई बदलावों को लेकर प्रतियोगी छात्रों ने सड़क पर उतर कर जबरदस्त आंदोलन चलाया था. तब छात्रों की पुलिस से भिड़ंत भी हुई थी. छात्रों के आंदोलन और न्यायपालिका में उनकी लड़ाई के बाद अध्यक्ष अनिल यादव को अपने पद से हटना पड़ा था. नए अध्यक्ष डॉ प्रभात कुमार के कई निर्णयों को लेकर प्रतियोगी छात्रों में फिर वैसी ही नाराजगी देखने को मिल रही है. वैसे तो नए अध्यक्ष ने सप्ताह में एक बार प्रतियोगी छात्रों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनने का भी अभियान चलाया था, जिसकी तारीफ भी हुई थी. लेकिन संघ लोक सेवा आयोग की तर्ज पर किए गए बदलावों के बाद आए नतीजे प्रतियोगी छात्रों की नाराजगी की सबसे ताजा और बड़ी वजह बन गए हैं.
आरओ-एआरओ परीक्षा में सांकेतिक रूप से विरोध का निर्णय भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है. आयोग के खिलाफ पहले आंदोलन करने वाले प्रतियोगी छात्रों से भी नए छात्र संपर्क में हैं और आंदोलन के लिए रणनीति बनाने पर काम शुरू हो गया है. पहले समीक्षा अधिकारी/सहायक समीक्षा अधिकारी परीक्षा 27 नवम्बर 2016 को प्रदेश के कई जिलों में आयोजित हुई थी. लेकिन पेपर लीक के कारण यह परीक्षा विवादों में आ गई थी और इसका परिणाम घोषित नहीं किया गया था.