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महीने भर से अधिक समय तक बिहार विधानसभा चुनाव के रंग में रंगा रहा। अब इसके पटाक्षेप का वक्त आ चुका है। सात नवंबर, शनिवार को तीसरे और अंतिम दौर के चुनाव के साथ राज्य में नई सरकार बनने का रास्ता साफ हो जाएगा। तमाम राजनीतिक दलों ने अपने प्रत्याशियों की जीत के लिए जो बन सकता था किया अब फैसला जनता को करना है। दो चरणों के चुनाव के दौरान165 सीटों का फैसला जनता ने दे दिया है। इस सीटों पर प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में बंद हो गई है। शनिवार को और 78 सीटों का फैसला जनता सुनाने वाली है, जिसका बेसब्री से सबको इंतजार है।
14 नए सीट पर पार्टी आजमा रही किस्मत
शनिवार को होने वाले चुनाव में कांग्रेस 25 सीटों पर अपनी किस्मत आजमा रही है। इन 25 सीटों में 11 उम्मीदवार ऐसे हैं जिन्होंने 2015 के चुनाव में जीत दर्ज कर विधानसभा तक पहुंचने में सफलता हासिल की थी। इन 11 सीटों में रीगा, बेनीपट्टी, अररिया, किशनगंज, बहादुरगंज, अमौर, कदवा, कस्बा, मनिहारी कोढ़ा और बेतिया हैं। इन 11 सीटों के अलावा 14 अन्य विधानसभा क्षेत्रों से कांग्रेस के उम्मीदवार सदन तक पहुंचने की जोर आजमाइश में लगे हैं। जिन 14 नए विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी किस्मत आजमा रही है। इनमें सुपौल, फारबिसगंज, प्राणपुर, बिहारीगंज, वाल्मीकि नगर, बगहा, रक्सौल, सोनबरसा, जाले, मुजफ्फरपुर, सकरा, बथनाहा, रामनगर और पूर्णिया शामिल हैं। इन 14 विधानसभा में पांच ऐसे हैं जहां से 2015 में भी पार्टी ने जोर तो लगाया था, लेकिन चुनाव जीतने में सफल नहीं हुई थी। ये क्षेत्र हैं बथनाहा, पूर्णिया, रामनगर, वाल्मीकि नगर और प्राणपुर। तीसरे दौर के चुनाव में कोसी-सीमांचल के क्षेत्र भी आते हैं। कांग्रेस ने 2015 में कोसी-सीमांचल से कांग्रेस ने छह सीटों पर जीत दर्ज कराई थी। इस चुनाव कांग्रेस ने कोसी-सीमांचल में नौ उम्मीदवारों पर दांव लगाया है।