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किसान आंदोलन का 55वां दिन, 20 जनवरी को होगी 11वें दौर की बैठक

किसानों के आंदोलन का आज 55वां दिन है। हाड़ गला देने वाली ठंड के बीच  कृषि कानूनों के खिलाफ किसान दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर डटे हुए हैं। किसान किसी कीमत पर अपनी मांगें मनवाए बिना वापस जाने के मूड में नहीं हैं। वहीं सरकार भी अपने रूख पर अड़ी है। किसान संगठनों और सरकार के बीच अबतक 10 दौर की बैठक हो चुकी है लेकिन अबतक कोई नतीजा नहीं निकल पाया है।

वहीं आज यानी 19 जनवरी को फिर सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच होने वाली 11वें दौर की बातचीत को एक दिन के लिए टाल दिया है। किसान संगठनों के साथ सरकार की ओर से मंत्री समूह की बैठक अब 19 जनवरी के बजाय 20 जनवरी को विज्ञान भवन में होगी।

इससे पहले सोमवार को ही किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा, कल भी हम सरकार से बात करेंगे लेकिन उम्मीद नहीं है कि कुछ हल निकलेगा। 26 जनवरी को हम दिल्ली की आउटर रिंग रोड पर ट्रैक्टर रैली निकालेंगेए सरकार की जहां परेड होती है हम वहां नहीं जाएंगे। किसान 26 जनवरी के अपने प्रस्तावित ‘किसान परेड’ के कार्यक्रम पर अमल करने और दिल्ली कूच करने पर अड़े हैं।

26 जनवरी को किसान जो ट्रैक्टर मार्च निकालना चाहते हैं उस पर अब बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसान यूनियनों से 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर प्रस्तावित ट्रैक्टर परेड पर फिर से विचार की अपील की है।

किसान संगठनों और सरकार के बीच अबतक 10 दौर की बैठक हो चुकी है लेकिन अबतक कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। दोनों पक्षों के बीच अब 19 जनवरी को एकबार फिर बातचीत होगी। इस बैठक से पहले कृषि मंत्री नरेन्द्र तोमर  ने कहा है कि सरकार किसानों के साथ खुले मन से बातचीत कर रही है। साथ ही तोमर ने ये भी कहा कि सरकार किसानों के साथ कानून के क्लॉज पर बात करना चाह रही है। लेकिन, किसान टस से मस नहीं हो रहे हैं। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए कहा है कि किसान, सरकार को कानून रद्द करने के अलावा कोई विकल्प बताएं। किसानों की हर आपत्ति को सरकार पूरी गंभीरता के साथ सुनेगी।

आपको बता दें कि कड़ाके की सर्दी और  गिरते पारे के साथ-साथ कोरोना के खतरों के बीच 26 नवंबर से बड़ी तादाद में किसान दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर डटे हैं। लेकिन किसान और सरकार के बीच अबतक इस मसले पर अबतक कोई सहमति नहीं बन पाई है। बड़ी तादाद में प्रदर्शनकारी किसान सिंधु, टिकरी, पलवल, गाजीपुर सहित कई बॉर्डर पर डटे हुए हैं। इस आंदोलन की वजह से दिल्ली की कई सीमाएं सील हैं।

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